दिल्ली राष्ट्री धरोहर इंडिया गेट का इतिहास
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India Get |
प्रस्तावना: मित्रो आज हम जानेगें इंडिया गेट के इतिहास के बारे इंडिया गेट को अखिल भारतीय युद्ध स्मारक कहते है भारत अपनी विरासत और स्मारकों के लिए भी जाना जाता है। इंडिया गेट एक युद्ध स्मारक है, जिसे देखने के लिए इंडिया ही नहीं बल्कि विदेशो से भी प्रयर्टक इसे देखने आते है। इंडिया गेट प्रथम विश्व युद्ध में मारे गए इंडिया और ब्रिटिश सैनिको की याद में बनाया गया है, और तीसरे एंग्लो अफगान युद्ध में शहिद सैनिको की याद के लिए भी जाना जाता है। गेट के पास ही अमर जवान ज्योति है जिसकी ज्योति अमर जवानो की याद में निरंतर जलती है, अमर जवान ज्योति के चारो तरफ ज्योति प्रज्जवलित होती रहती है, अमर जवान ज्योति के चबूतरे पर शोक के मुद्रा में एक उल्टा राइफल और उसके ऊपर सैनिक हैट कैप लगा है।
अमर जवान ज्योति की नीव: स्वर्गी इंद्रा गाँधी ने भारत पाक युद्ध और चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिको की याद में जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया उन वीर सहीदो की याद में 1971 निर्माण की नीव रखी थी, जिसका उद्धघाटन 26 जनवरी 1972 को इंद्रा गाधी ने किया था। तबसे अमर जवान ज्योति अनवरत प्रज्जवलित होती चली आरही पहले यह ज्योति एलपीजी से और अब सीएनजी से ज्योति को प्रज्वलित किया जाता है।
इंडिया गेट की उचाई 42 मीटर और चौड़ाई 9.1 मीटर के करीब है, जहा इंडिया गेट स्थित है उसका क्षेत्रफल 3,60,000 स्क़्वायर मीटर है, हेक्सागोनल परिसर के 625 मीटर की व्यास परिध में स्थित है, इसका आधारशिला द ड्यूक कनॉट ने 10 फरवरी 1921 को रखी थी जिसका उद्धघाटन वाइसरॉय लॉर्ड इरविन ने 10 साल बाद 12 फरवरी 1931 को किया।
इंडिया गेट को डिजाइन एडविन लुटियंस ने किया था जो उस समय के बहुत बड़े डिजाइनर थे, इंडिया गेट के सामने एक छतरी के निचे किंग-जार्ज पंचम की मूर्ति भी स्थापित किया था, जिसको बाद में इंडियन गोरमेंट ने हटा कर कोरोनेशन पार्क में अस्थापित करा दिया अब वहाँ बस छतरी ही बची है।
इंडिया गेट की डिजाइन: पेरिस के आर्क डे ट्रॉयम्फ़ से प्रभावित है। इसके पथरो पर 13300 सैनिकों के नाम अंकित किए गये है। यह 90000 युद्ध में शहीद हुए सेनिको को श्रद्धांजलि देने के लिए निर्माण कराया गया था। जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश हुकूमत के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। प्रथम विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914 से 11 नवंबर 1918 तक चला था। तीसरा एंग्लो-अफ़ग़ान युद्ध 1919 में लड़ा गया था।
अमर जवान ज्योति: पर प्रत्येक 26 जनवरी और 15 अगस्त को देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री श्रद्धासुमन अर्पित करने जाते है। इंडिया गेट से लाल किले तक सैनिको की परेड और निकाली जाती है।
इंडिया गेट का निर्माण ग्रेनाइटऔर लाल बलुआ पत्थर से किया गया है।
प्रथम नेशनल वॉर मेमोरियल: अभी हाल ही में इंडिया गेट के पास भारत के प्रधान मंत्री द्वारा प्रथम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को 25 फरवरी 2019 को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 44 एकड़ में बना प्रथम नेशनल वॉर मेमोरियल राष्ट्र को समर्पित किया। आजादी से लेकर हुए युद्धों में वीरगति प्राप्त सशस्त्र बलों को सम्मानित करने के लिए बनाया गया है।
दिल्ली: इंडिया गेट और प्रथम नेशनल वॉर मेमोरियल दिल्ली में स्थित है।
National heritage
ReplyDelete👌
ReplyDeleteHeritage built in memory of brave soldier
ReplyDeleteVery very nice
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